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IAS Prachi Chauhan Success Story : हिंदी मीडियम से किसान की बेटी ने UPSC में हासिल की 260वीं रैंक, सेल्फ स्टडी से की परीक्षा पास

IAS Prachi Chauhan Success Story : संघ लोक सेवा आयोग(UPSC)की परीक्षा देश की कठिन परीक्षाओं में से एक है। UPSC की परीक्षा को पास करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इस परीक्षा के लिए बच्चे ही नहीं, उनके माता-पिता का भी पूरा संघर्ष होता है। UPSC की परीक्षा पास करने वालों में एक नाम इस बेटी का भी है, जिसने हिंदी मीडियम से परीक्षा को पास करके देश का नाम रोशन किया। 
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हिंदी मीडियम से किसान की बेटी ने UPSC में हासिल की 260वीं रैंक

IAS Prachi Chauhan Success Story : देश के हर युवा का सपना होता है कि वे संघ लोक सेवा आयोग(UPSC)की परीक्षा पास करके IAS या IPS अधिकारी बनें। आज हम आपको एक ऐसी ही अधिकारी के बारे में बता रहे है, जिन्होंने सेल्फ स्टडी से परीक्षा को पास करके देश का नाम रोशन किया।

हम बात कर रहे है आईएस प्राची चौहान(IAS Prachi Chauhan) की। प्राची ने इस परीक्षा को पास करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की है। 

प्राची कहां की रहने वाली है

IAS  प्राची चौहान मध्य प्रदेश के विदिशा जिला के तहसील गंजबासौदा के ग्राम जौहद की रहने वाली है। प्राची एक साधारण से परिवार से आती है।

प्राची के पिता चंद्रभान सिंह चौहान एक किसान हैं और उनकी माता साधना चौहान एक गृहणी हैं। उन्हें बचपन से ही आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।

प्राची की शुरुआती पढ़ाई

IAS प्राची ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। उसके बाद प्राची ने  गंजबासौदा के कॉलेज से बीएससी (BSc Mathematics) में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। प्राची ने हमेशा से सेल्फ स्टडी करके परीक्षाओं को पास किया. 

ऐसे की UPSC की तैयारी 

प्राची ने BSc के दूसरे साल से ही UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। प्राची ने हिंदी मीडियम से तैयारी शुरू की। जिसके लिए वे घर पर ही किताबों से पढ़ती थी।

आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने लगातार तीनों अटेम्प्ट गांव में रहकर सेल्फ स्टडी की मदद से परीक्षा दी, लेकिन वे हर बार असफल रही। असफलता मिलने के बाद भी प्राची ने हार नहीं मानी और अपने चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा को पास कर लिया।

उसके बाद मेंन्स परीक्षा की तैयारी के लिए प्राची दिल्ली आई। साल 2025 में प्राची ने UPSC CSE की परीक्षा को पास करके ऑल इंडिया 260वीं रैंक हासिल कर ली. प्राची युवाओं के लिए एक प्रेरणा बनी कि असफलता मिलने पर भी कभी हार नहीं माननी चाहिए।