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AAS App : हरियाणा सरकार के इस AAS App से अब नहीं जाना पड़ेगा बार-बार दफ्तरों में कामों के लिए, जानिए कैसे

AAS App : हरियाणा वासियों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त श्री टी.सी. गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) ने आज चंडीगढ़ में वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर नागरिकों की सुविधा के लिए एएएस व्हाट्सएप चैटबॉट तथा एएएस मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ भी किया गया।
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AAS App : हरियाणा सरकार के इस AAS App से अब नहीं जाना पड़ेगा बार-बार दफ्तरों में कामों के लिए, जानिए कैसे

Newz Fast, New Delhi इस अवसर पर हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन की सचिव डॉ. सरिता मलिक, अंडर सेक्रेटरी-कम-रजिस्ट्रार श्री सुबे खान एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

डिजिटल माध्यम से सेवाएं होंगी और सरल, अपील प्रक्रिया अब मोबाइल पर आसान

मुख्य आयुक्त श्री टी.सी. गुप्ता ने कहा कि आयोग “पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध सेवा” के सिद्धांत पर कार्य करते हुए नागरिकों को सरकारी सेवाएं सरल, सुलभ और तय समयसीमा में उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप चैटबॉट और मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से नागरिक अब अपील दायर करने, उसकी स्थिति जानने तथा सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में और अधिक सुविधा महसूस करेंगे।

“सेवाएं आपकी उंगलियों पर, कभी भी, कहीं भी” की अवधारणा के तहत यह पहल नागरिकों को डिजिटल माध्यम से त्वरित सहायता प्रदान करेगी।

यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को व्हाट्सएप के जरिए तेज, सरल और बिना किसी परेशानी के सेवाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे वे अपने मोबाइल फोन से ही आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और अपील प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।

नागरिक इस चैटबॉट का उपयोग किसी भी समय व्हाट्सएप नंबर 6239466937 पर संदेश भेजकर कर सकते हैं।

802 सेवाएं समयबद्ध व्यवस्था के दायरे में, एएएस बना सबसे बड़ा सुधार

मुख्य आयुक्त श्री टी.सी. गुप्ता ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 का मूल उद्देश्य नागरिकों और उद्यमियों को अधिसूचित सेवाएं तय समयसीमा में उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अनिश्चित प्रतीक्षा, बार-बार फॉलोअप या कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

उन्होंने बताया  वर्तमान में 56 विभागों और संगठनों की 802 सेवाएं हरियाणा सेवा का अधिकार ढांचे के अंतर्गत आती हैं।

इनमें जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र, रिहायशी प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, विवाह पंजीकरण, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, बिजली-पानी से जुड़ी सेवाएं, फैक्टरी लाइसेंस, दुकान पंजीकरण, भवन योजना स्वीकृति, औद्योगिक प्लॉट तथा उद्योगों से संबंधित विभिन्न सेवाएं शामिल हैं।

मुख्य आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2021 में शुरू की गई स्वतः अपील प्रणाली (ऑटो अपील सिस्टम–एएएस) इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण सुधार साबित हुई है।

यदि किसी नागरिक की अधिसूचित सेवा तय समयसीमा में पूरी नहीं होती, तो अपील स्वतः दर्ज हो जाती है। नागरिक को इसके लिए जिला मुख्यालय, विभागीय कार्यालय या चंडीगढ़ के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं रहती।

यदि नागरिक सेवा से असंतुष्ट हो, तो वह स्वयं सरल पोर्टल के माध्यम से अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अंत्योदय सरल हेल्पलाइन (0172-3968400) पर कॉल करके भी अपील दर्ज करवाई जा सकती है। यह हेल्पलाइन सोमवार से शनिवार, सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक कार्य करती है।

वार्षिक प्रतिवेदन के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरल प्लेटफॉर्म पर अधिसूचित सेवाओं के लिए 2.06 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।

इनमें से लगभग 1.95 करोड़ आवेदन (94.71 प्रतिशत) निर्धारित समयसीमा के भीतर निपटाए गए। लगभग 9.63 लाख आवेदन विलंबित रहे, जबकि 1.25 लाख आवेदन 31 मार्च, 2026 तक प्रक्रिया में लंबित थे।

आयोग ने बताया कि एएएस पर अब तक 28.5 लाख से अधिक अपीलें प्राप्त हो चुकी हैं और इनमें 98 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटान किया जा चुका है। वर्तमान में 63 संगठनों की 750 से अधिक सेवाएं इस प्रणाली के माध्यम से मॉनिटर की जा रही हैं।

ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिला मजबूत डिजिटल आधार

मुख्य आयुक्त श्री टी.सी. गुप्ता ने कहा कि हरियाणा सेवा का अधिकार व्यवस्था नागरिकों के लिए जीवन को आसान बनाने (ईज ऑफ लिविंग) और उद्योगों व कारोबार के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) दोनों को मजबूत करती है।

उन्होंने कहा कि एक नागरिक को यदि प्रमाणपत्र चाहिए और किसी उद्यमी को स्वीकृति या अनुमति की आवश्यकता हो, तो दोनों के लिए तय समय सीमा और स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक होती है। हरियाणा का सेवा का अधिकार ढांचा दोनों को कानूनी और डिजिटल समर्थन प्रदान करता है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान आयोग ने विभिन्न विभागों को प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

इनमें रिहायशी प्रमाणपत्र की पूर्व सत्यापन व्यवस्था में सुधार, बिजली बिलों में स्पष्ट जानकारी सुनिश्चित करना, प्रॉपर्टी आईडी आवेदनों में अनिश्चित रिवर्जन रोकना, उच्च शिक्षा में डिग्री वितरण की ट्रैकिंग व्यवस्था मजबूत करना तथा कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध करवाने जैसे कदम शामिल हैं।

मुख्य आयुक्त श्री टी.सी. गुप्ता ने कहा कि यह व्यवस्था विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्ग नागरिकों, श्रमिकों और उन लोगों के लिए राहतकारी सिद्ध हुई है, जिनके लिए बार-बार सरकारी कार्यालय जाना कठिन होता है।

अब नागरिक को यह पता लगाने की आवश्यकता नहीं रहती कि अपील किस अधिकारी को करनी है। प्रणाली स्वयं देरी को पहचानती है और मामला अगले स्तर पर भेज देती है।

उन्होंने बताया कि आयोग में आने वाले मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाती है, जिसमें अपीलकर्ता और संबंधित विभाग दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

आयोग का कार्यालय ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से पेपरलेस तरीके से कार्य कर रहा है, जिससे मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और गति आई है।

मुख्य आयुक्त ने कहा कि स्वतः अपील प्रणाली ने सेवा वितरण को नागरिक की पहल पर निर्भर व्यवस्था से बदलकर प्रणाली आधारित व्यवस्था बना दिया है। अब देरी होने पर नागरिक को सिस्टम के पीछे नहीं जाना पड़ता, बल्कि सिस्टम स्वयं नागरिक के पक्ष में सक्रिय हो जाता है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा की यह प्रणाली अब राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मॉडल के रूप में उभर रही है। भारत सरकार की डी-रेगुलेशन इनिशिएटिव में इसे प्राथमिकता क्षेत्र के रूप मंब पहचाना गया है और कई राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश इसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।