Petrol Diesel : बढ़ती मांग के कारण सरकार ने किए पेट्रोल डीजल के दामों में बदलाव, जानिए पूरी जानकारी

पेट्रोल और डीजल के दामों ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर सेंध लगाई है। वैश्विक ऊर्जा संकट और देश में तेजी से बढ़ती मांग के चलते सरकार ने ईंधन कीमतों में बड़ा बदलाव किया है।
 

Newz Fast, New Delhi पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसका असर सीधे पंप पर दिख रहा है।

वैश्विक संकट ने बढ़ाई परेशानी

ईरान-इजरायल संघर्ष ने कच्चे तेल की सप्लाई चेन को हिला दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले 20 फीसदी ग्लोबल क्रूड का रास्ता खतरे में पड़ गया।

भारत जैसे आयातक देश के लिए यह बुरी खबर है, क्योंकि हम 85 प्रतिशत तेल बाहर से लाते हैं। OPEC+ के उत्पादन कटौती ने कीमतों को और भड़काया।

देशभर में वाहनों की संख्या बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की खपत 10 प्रतिशत सालाना उछाल पर है। लॉकडाउन के बाद मांग पटरी पर लौटी तो कीमतें कंट्रोल से बाहर हो गईं। सरकार ने इसे देखते हुए एक्साइज ड्यूटी में बदलाव किया, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत कम मिली।

एक्साइज ड्यूटी में कटौती का सच

26 मार्च को वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। डीजल पर 10 रुपये से जीरो। ATF पर भी बदलाव हुए, निर्यात शुल्क डीजल के लिए 18.5 रुपये तय। लेकिन सरकारी सूत्र साफ कहते हैं—रिटेल दामों में कटौती नहीं होगी।

यह कदम तेल कंपनियों को राहत देने के लिए है, जो महंगे क्रूड खरीद रही हैं। राज्य सरकारों का वैट वही रहेगा, इसलिए दिल्ली में पेट्रोल 94.77 और डीजल 87.67 रुपये पर स्थिर। मुंबई में 103 और 90 के आसपास। IOCL ने इंडस्ट्रियल डीजल 22 रुपये महंगा किया।

शहरों में नई कीमतों का अपडेट

मेट्रो सिटीज में रोज सुबह 6 बजे दरें अपडेट होती हैं। नोएडा में पेट्रोल 94.85, डीजल 87.98। कोलकाता और चेन्नई में भी 1-2 रुपये का फर्क। ग्रामीण इलाकों में ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने से महंगाई का डर। ट्रकर्स और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित।

सरकार ने 60 दिनों का स्टॉक जमा किया है, लेकिन $130 प्रति बैरल से ऊपर क्रूड जाने पर दाम बढ़ सकते हैं। अभी $100 के आसपास हैं, इसलिए फिलहाल स्थिरता। विपक्ष हमलावर, कह रहे हैं महंगाई रोकने में नाकाम।

बढ़ती मांग के पीछे के कारण

लोगों ने कारें-बाइकें खरीदीं, EV धीमी रफ्तार से बढ़ रहे। आर्थिक रिकवरी ने ट्रांसपोर्ट डिमांड बढ़ाई। कोविड के बाद विकास कार्यों पर खर्च बढ़ा, टैक्स से राजस्व जुटाना पड़ा। पेट्रोलियम मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय उत्पादन कटौती को जिम्मेदार ठहराया।

ऑटो सेक्टर बूम, ई-कॉमर्स डिलीवरी और टूरिज्म ने ईंधन खपत को रफ्तार दी। गर्मियों में AC यूज बढ़ने से भी असर। सरकार अब बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर दे रही।

अर्थव्यवस्था पर असर और उपाय

ईंधन महंगा होने से महंगाई दर 6 प्रतिशत के ऊपर चली गई। खाद्य पदार्थ, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़े। मिडिल क्लास की बचत घटी, किसानों की लागत बढ़ी। सरकार ने LPG रेट्स पर भी नजर रखी।

वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाया, रूस और अमेरिका से डील्स मजबूत। स्टेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भरा। लॉन्ग टर्म में रिफाइनरी क्षमता बढ़ाने की योजना। उपभोक्ताओं को CNG और EV की सलाह।

आगे क्या होगा?

सरकार आश्वासन दे रही—क्रूड $130 न पार करे तो दाम स्थिर। लेकिन जियोपॉलिटिकल टेंशन से अनिश्चितता। विपक्ष हल्ला बोल रहा, चुनावी साल में मुद्दा बनेगा। आम आदमी कार शेयरिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाए।

बढ़ती मांग को काबू करने के लिए डिमांड मैनेजमेंट जरूरी। अगर युद्ध थमा तो राहत मिलेगी, वरना जेब ढीली होती जाएगी। सरकार का कदम तेल कंपनियों को बचाने वाला है, उपभोक्ता इंतजार करें।