Athira Sugathan Struggle Success Story : हादसे के बाद खोई याददाश्त, व्हीलचेयर बनी सहारा, UPSC में किया टॉप
Athira Sugathan Struggle Success Story : संघ लोक सेवा आयोग(UPSC) की परीक्षा को पास करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। UPSC की परीक्षा में पास होने के लिए बहुत कुछ खोना भी पड़ता है।
आज हम आपको एक ऐसी महिला अधिकारी के बारे में बता रहे है, जिन्होंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखें है। हम बात कर रहे है अथिरा सुगाथन (Athira Sugathan)की।
अथिरा का परिवार और पढ़ाई
अथिरा केरल राज्य के कोझिकोड जिले की रहने वाली हैं। अथिरा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा सरकारी स्कूलों से पूरी की। उसके बाद अथिरा बेंगलुरु चली गईं।
वहां पर अथिरा ने राजराजेश्वरी डेंटल कॉलेज (Rajarajeswari Dental College) में बीडीएस (BDS) की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। बीडीएस (BDS) की पढ़ाई करते समय 2016 में उनका एक गंभीर सड़क हादसे हुआ। जिसके बाद उस हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी।
मौत से जंग और याददाश्त का सफर
बेंगलुरु में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई करते समय 2016 में दोस्तों के साथ एक ट्रिप के दौरान सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में अथिरा गंभीर रूप से घायल हो गई थी। हादसे के बाद अथिरा अस्पताल में 21 दिन तक वेंटिलेटर पर रहीं।
उस समय उनका शरीर के नीचे का हिस्सा पैरालिसिस हो गया। इतना ही नहीं, लगभग दो साल तक अम्नेशिया (याददाश्त की कमी) का सामना करना पड़ा। अथिरा को ये भी याद नहीं था कि वे BDS की छात्रा हैं।
अथिरा के इलाज के समय अधिकतर डॉक्टरों ने हार मान ली, लेकिन उनके परिवार ने और आयुर्वेदिक इलाज की मदद से उनकी याददाश्त वापिस आ गई। उस समय अथिरा ने हिम्मत ही हारी। उसके बाद अथिरा ने बेंगलुरु लौटकर अपनी पढ़ाई पूरी की।
दिव्यांगता से प्रेरणा- सिविल सेवा का सपना
अपनी पढ़ाई पूरी करने बाद साल 2020 में अथिरा कोझिकोड वापस लौट आई। वापिस आने के बाद अथिरा ने एक एनजीओ के साथ जुड़कर दिव्यांगजनों के लिए काम शुरू किया।
कोविड के समय अथिरा को एहसास हुआ कि ऐसे लोगों को समाज में कितनी परेशानी और कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए अथिरा ने फैसला किया कि वे UPSC की तैयारी करेंगी। UPSC की तैयारी के लिए अथिरा तिरुवनंतपुरम एक IAS कोचिंग अकादमी में दाखिला लिया।
इस कोचिंग में दिव्यांग उम्मीदवारों को स्पेशल सपोर्ट मिलता है। अथिरा ने UPSC में मलयालम भाषा को ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना। अथिरा ज्यादातर ऑनलाइन क्लास लगाती थी। कई बार वे अपने माता-पिता के साथ तिरुवनंतपुरम जाकर भी पढ़ाई करती थी।
बहन अनघा बनी सबसे बड़ा सहारा
अथिरा की बहन उनका सबसे बड़ा सहारा बनी। अनघा BSc साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही थी। अथिरा की देखभाल के लिए अनघा को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर उनकी देखभाल करने के लिए BSc नर्सिंग में एडमिशन ले लिया ताकि बेहतर तरीके से उनकी केयर कर सकें। अथिरा अपनी सफलता का श्रेय अपनी बहन अनघा को देती है। व्हीलचेयर पर बैठकर हर परीक्षा देती थी।
UPSC की परीक्षा और रिजल्ट
अथिरा ने कई बार UPSC की परीक्षा दी लेकिन वे हर बार असफल रही। अथिरा ने असफलता को देखते हुए हार नहीं मानी। अथिरा ने अपने चौथे प्रयास में UPSC CSE 2025का परीक्षा पास करके ऑल इंडिया 483वीं रैंक हासिल की।
अथिरा दिव्यांग (PwBD) कैटेगरी (लोकोमोटर डिसेबिलिटी, PwBD-3) में आती हैं। UPSC में PwBD - Persons with Benchmark Disabilities) के लिए अलग मेरिट लिस्ट बनाई जाती है, जिसमें 6-8 सीटे होती है।